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किसानों के साथ तालाब में उतरे राहुल गांधी, मखाने की खेती समझने के लिए की बातचीत, बोले- मुनाफा तो…

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Rahul Gandhi Bihar Visit
किसानों के साथ तालाब में उतरे राहुल गांधी
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बिहार के पूर्णिया, कटिहार, अररिया जैसे जिलों में मखाने की खेती बड़े पैमाने पर होती है. शनिवार को वोटर अधिकार यात्रा के तहत कटिहार पहुंचे राहुल गांधी ने मखाने की खेत में उतककर इसकी खेती समझी. वोटर अधिकार यात्रा के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार को कटिहार पहुंचे कटिहार में उन्होंने मखाने की खेती देखी घटने तक भरे पानी से खेत में उतरकर मखाने की खेती को जाना.

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किसानों के साथ तालाब में उतरे राहुल गांधी

फिर पास में ही मखाने को तैयार कर किसान और मजदूरों के साथ बैठकर मखाने की प्रोसेसिंग का भी तरीका जाना. इस दौरान उन्होंने किसान से भी बात की इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि बिहार दुनिया का 90 प्रतिशत मखाना उगाता है। मगर दिन रात धूप पानी में मेहनत करने वाले किसान मजदूर मुनाफे का 1 प्रतिशत भी नहीं कमाते हैं। राहुल गांधी ने लिखा आज इन किसानों से उनके खेतों में मिलकर उनकी आपबीती जानी बड़े शहरों में एक हजार या दो हजार रुपए किलो बिकता है.

मगर इन मेहनतकशों, पूरे उद्योग की नींव को, नाम मात्र का दाम मिलता है. कौन हैं ये किसान-मज़दूर? अतिपिछड़े, दलित – बहुजन. पूरी मेहनत इन 99 प्रतिशत बहुजनों की और फ़ायदा सिर्फ़ 1 प्रतिशत. कांग्रेस नेता ने आगे लिखा कि वोट चोर सरकार को ना इनकी कदर है ना फिकर , न आय दिया,नहीं न्याय ,वोट का अधिकार और हुनर का हक एक सिक्के के दो पहलू हैं।

इन दोनों को हम खोने नहीं देंगे राहुल गांधी के साथ वोटर अधिकार यात्रा में चल रहे VIP के संस्थापक मुकेश साहनी ने भी मखाना किसानों से मुलाकात की , उन्होंने खुद मखाना फोड़ा । दरअसल लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में महागठबंधन की वोट चोरी के खिलाफ निकाली गई यह यात्रा 7 वे दिन कटिहार पहुंची.

यहां मखाना किसानों से नेताओं ने मुलाकात की और उनकी समस्याओं को जाना मुकेश सहनी मखाना किसानों के साथ तालाब में उतरे और मखाना निकाला फिर बाद में गर्म भूंजे हुए मखाना को फोड़ कर राहुल गांधी को दिखाया. उन्होंने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को तालाब से लेकर पूरी तरह तैयार करने की विधि समझाई.

वीआईपी नेता मुकेश सहनी ने मखाना किसानों की समस्याओं को लेकर कहा कि इनको लेकर सरकार ने भाषण तो खूब दिए लेकिन इनके दिन अभी तक नहीं सुधरे.ये दिन रात एक कर मखाना तैयार करते हैं लेकिन इसकी कीमत आज तक इन्हें नहीं मिलती.

शहर में मखाने की कीमत एक हजार किलोग्राम है लेकिन इन्हें यहां काम कीमत मिलती है. बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने भी कहा कि महागठबन्धन की सरकार बनने के बाद इनकी जिंदगी में भी खुशहाली आएगी और इनके घरों में इनके उत्पाद की अच्छी कीमत मिले ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी.

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