Home ज्योतिष/धर्म Chhath Puja 2025 : नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा महापर्व छठ, नोट करें शुभ मुहूर्त और सही तिथि
ज्योतिष/धर्म

Chhath Puja 2025 : नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा महापर्व छठ, नोट करें शुभ मुहूर्त और सही तिथि

Share
Chhath Puja 2025
नोट करें शुभ मुहूर्त और सही तिथि
Share

दीपावली के रौनक के बाद अब भागलपुर में गंगा तटों से लेकर घर आंगन तक लोक आस्था के सबसे बड़ा पर्व छठ की गूंज सुनाई देने लगी है। शनिवार 25 अक्टूबर से नहाए खाए के साथ चार दिवसीय इस महापर्व की शुरुआत होगी। घाटों की सफाई , व्रतियों की तैयारी और छठ मईया के पारंपरिक गीतों की मशहूर लहरियों से पूरा शहर श्रद्धा और भक्ति में रंगने लगा है।

Chhath Puja 2025
नोट करें शुभ मुहूर्त और सही तिथि

ऐसे भी अंग की यह धरती सूर्य उपासना के लिए युगों युगांतर से जानी जाती है। छठ महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं , बल्कि आत्म सुधि , प्रकृति और सूर्य देव की प्रति कृतियां का पर्व है। व्रती कठोर नियम और पवित्रता का पालन करते हुए निराहार रहकर सूर्योपासना करते हैं।

लोक आस्था का यह पर्व भागलपुर में सामाजिक एकता , सादगी और भक्ति की ऐसी मिशाल पेश करता है। जो हर वर्ष जनमानस को जोड़ता है। गंगा की लहरों पर प्रतिबिंबित द्वीपों की ज्योति और व्रतियों के आस्था संकल्प से इस बार भी भागलपुर छठ पर अलौकिक आभा से दमकती है।

मोहल्लों और गलियों में उग हो सूरज देव अरघा के बेर जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज वातावरण को भक्ति से भर रही है। महिलाएं पूजा की सामग्री में व्यस्त है , वहीं बच्चे और सजावट और साफ सफाई में उत्साह से हाथ बटा रहे हैं। मिट्टी के नए चूल्हे , गुड़ चावल, सूप और फल की खरीदारी से बाजार गुलजार है ।

लोक परंपराओं और सामूहिक आस्था और अनोखा संगम भागलपुर की संस्कृति को एक बार फिर जीवित कर रहा है। 25 अक्टूबर नहाए खाए गंगा जल से स्नान कर सात्विक आहार कद्दू, अरवा चावल के भात , चना की दाल के साथ व्रतियों की शुरुआत होती है। 26 अक्टूबर रविवार खड़ना दिनभर निर्जला उपवास के बाद देर शाम गुड , चावल,और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

27 अक्टूबर सोमवार संध्या अर्ध अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध अर्पित किया जाएगा शुभ मुहूर्त शाम 5.10 बजे से 5.58 अपराह्न 28 अक्टूबर मंगलवार प्रातः कालीन अर्ध उदयाचल सूर्य को अर्ध अर्पण के बाद व्रत का समापन । शुभ मुहूर्त सुबह 05.33से 6.30 पूर्वाह्न रहेगा । भागलपुर के नगर निगम क्षेत्र सबौर नगर पंचायत का क्षेत्र में पड़ने वाले गंगा घंटों की साफ सफाई , लाइटिंग आदि का विशेष अभियान के तहत आरंभ कर दी गई है।

प्रशासन के अलावा स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं भी छठ घाटोंकी रोशनी । रंगोली और सजावटी तोड़नी से सजाने की तैयारी कर रही है । श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए NDRF और गोताखोरों की टीम की तैनाती की योजना भी बनाई जा रही है। सूर्य उपासना की अदभुत परम्परा। छठ एक मात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते सूर्य और उगते सूर्य को अर्ध दिया जाता है। यह जीवन के आरम्भ और अंत दोनों के प्रति कृतियागता का पर्व है प्रकृति और शुद्धता का पर्व वर्ती बिना नमक,तेल, माले के सात्विक आहार लेते हैं।

मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनाते हैं यह पर्यावरण एवं संवेदनशील और शुद्ध जीवनशैली का संदेश देता है। पारिवारिक एकता का उत्सव छठ की पूजा में पूरा परिवार शामिल होता है। जो सामूहिक सहयोग और पारिवारिक एक जुटता का संदेश है। लोक संगीत और संस्कृति का उत्सव उग हो सूरज देव अरघा के बेर जैसे लोक गीत पीढ़ियों से चली आ रही है।

लोकसंस्कृति की जीवंत धरोहर है। जो बिहार की मिट्टी की आत्मा से निकला है। आस्था और अनुशासन का प्रतीक । यह पर्व सांसारिक सुखों से विरक्त होकर आत्मसंयम और समर्पण की भावना को जगाता है। व्रती शरीर , मन और आत्मा तीनों का सुध करने का संकल्प लेते हैं।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *