विदेशी टर्किश नस्ल की मुर्गी किसानों के लिए वरदान बन रही है. इसकी मांस और अंडों की भारी मांग है, जिससे किसान लाखों की कमाई कर रहे हैं. कम खर्च और बेहतर उत्पादन क्षमता इसे स्थानीय नस्लों से अलग बनाती है. यही वजह है कि किसान तेजी से इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. बदलते वक्त के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं की सोच भी तेजी से बदल रही है.
खेती के साथ अब पशुपालन को भी एक सफल व्यवसाय के रूप में अपनाया जा रहा है. खासतौर पर विदेशी नस्ल की टर्किश मुर्गियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है. कम समय में ज्यादा वजन, प्रीमियम क्वालिटी का मांस और अंडों की भारी मांग के चलते यह मुर्गी पालन का नया ट्रेंड बन गया है.
टर्किश मुर्गियों की खास बात यह है कि ये पारंपरिक ब्रॉयलर या देशी मुर्गियों की तुलना में काफी तेजी से वजन बढ़ाती हैं. मात्र तीन से चार महीने में एक मुर्गी 4 से 6 किलो तक वजन प्राप्त कर लेती है इनके मांस की खासियत यह है कि यह बेहद सॉफ्ट होता है, जिसे बड़े होटल, सुपरमार्केट और प्रोसेसिंग यूनिट्स में प्रीमियम रेट पर खरीदा जाता है.
वहीं इनके अंडे भी आकार में बड़े और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जिससे इनकी बाजार में डिमांड बनी रहती है.विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई किसान या युवा उद्यमी 200 से 300 टर्किश मुर्गियों से फार्मिंग की शुरुआत करता है, तो तीन महीने में ही 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है. इन मुर्गियों के मांस की बाजार में कीमत 350 से 500 रुपये प्रति किलो तक होती है, जो आम ब्रॉयलर के मुकाबले काफी ज्यादा है.
सरकार की ओर से भी इस फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग कैंप, सब्सिडी योजनाएं और बैंक लोन जैसी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं. कई राज्यों में पशुपालन विभाग की मदद से युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे इस व्यवसाय को तकनीकी रूप से समझकर आगे बढ़ा सकें.
आज देशभर में कई युवा इसे स्वरोजगार का बेहतर विकल्प मानकर फार्मिंग की ओर बढ़ रहे हैं. अगर आप भी खेती-बाड़ी या व्यवसाय में कुछ नया करना चाहते हैं टर्किश मुर्गियों का पालन आपके लिए एक लाभकारी और टिकाऊ विकल्प बन सकता है. यह फार्मिंग कम समय में ज्यादा लाभ देने के साथ-साथ स्थानीय बाजार में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है.

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